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इशरत जहाँ हत्या मे sit चीफ का नया खुलासा

नई दिल्ली: इशरत जहां मामले में हर रोज एक नया पेंच सामने आ रहा है। सीबीआई जांच में सहयोग करने वाले  पूर्व एसआईटी चीफ सतीश वर्मा ने गृह मंत्रा...

Thursday, 3 March 2016

इशरत जहाँ हत्या मे sit चीफ का नया खुलासा

नई दिल्ली: इशरत जहां मामले में हर रोज एक नया पेंच सामने आ रहा है। सीबीआई जांच में सहयोग करने वाले  पूर्व एसआईटी चीफ सतीश वर्मा ने गृह मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी रहे आरवीएस मणि के आरोपों को तथ्यहीन बताया है। आईबी को फंसाने के लिए मणि को सिगरेट से दागने के उनके आरोप पर सतीश वर्मा ने कहा कि मणि झूठ बोल रहे हैं। 

अदालत द्वारा इशरत जहां इनकाउनर मामले में नियुक्त एक एसआईटी टीम के सदस्य रहे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सतीश वर्मा ने बताया कि साल 2004 में गुजरात में हुआ ये एनकाउंटर इशरत जहां की पूर्व नियोजित हत्या थी। इस मामले में उन्होंने पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम के उन पर दबाव बनाने के आरोपों को खारिज कर दिया।

सतीश वर्मा ने कहा कि हमने जो जाचं कि उससे पता चला कि एनकाउंटर से कुछ दिन पहले आईबी अधिकारियों ने इशरत जहां और उसके तीन साथियों को अगवा किया था। इन लोगों को गैर कानूनी रूप से हिरासत में रखा गया और फिर हत्या करदी गयीं। सतीश वर्मा इशरत जहाँ मामले की जांच के लिए गुजरात हाई कोर्ट की ओर से बनाई गई स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (SIT) के सदस्य भी थे।

महाराष्ट्र के मुंब्रा की रहने वाली इशरत जहां और उसके तीन अन्य साथियों की अहमदाबाद के बाहरी इलाके में 15 जून 2004 को पुलिस द्वारा हत्या की गयीं थी। पुलिस ने आरोप लगाया गया था कि ये सभी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे। पिछले सप्ताह पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने कहा था कि लश्कर के इस समूह को 2004 में आईबी ने ही गुजरात आने का लालच दिया था।

आईपीएस अधिकारी और एसआईटी सदस्य सतीश वर्मा ने आरवीएस मणि के आरोप को भी गलत बताया है मणि ने आरोप लगाया था कि उन्हें सिगरेट से जला कर प्रताड़ित किया गया। मणि ने गुजरात हाई कोर्ट में केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से मामला दायर किया था। उन्होंने एक हिंदी टीवी चैनल से कहा कि 19 वर्षीय एक लड़की की जान-बूझकर हत्या को राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर बचाव नहीं किया जा सकता।

पूर्व sit चीफ वर्मा ने कहा कि सीबीआई जांच के दौरान ऐसी चीज कभी नहीं हो सकती। मान लीजिए ऐसा मैंने  किया है, अगर ऐसा है तो यह एक कसूर और अपराध है। मणि को पता होना चाहिए कि अगर ऐसा था तो वह मेरे खिलाफ कार्रवाई के लिए कानून का सहारा भी ले सकते है।

वर्मा ने मणि के सभी आरोपों को आधारहीन बताया। वर्मा ने कहा कि मणि का उद्देश्य कुछ और है। वह केस को कमजोर करना चाहते हैं। पुलिस जांच में गवाहों के निवेदन रिकॉर्ड किए जाते हैं, गवाहों के हस्ताक्षर नहीं लिए जाते हैं। मणि भी इस मामले में गवाह थे। उनका जो भी बयान देना था उसपर हस्ताक्षर नहीं होता है इसलिए इसके लिए दबाव का प्रश्न ही नहीं है।

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